ताज़ा खबर
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श्री पुष्कर सिंह धामी
माननीय मुख्यमंत्री एवम अध्यक्ष, उत्तराखण्ड भाषा संस्थान
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श्री सुबोध उनियाल
माननीय भाषा मंत्री एवम कार्यकारी अध्यक्ष उत्तराखण्ड भाषा संस्थान
विभाग के बारे में
भाषा अभिव्यक्ति अथवा सम्प्रेषण का माध्यम ही नहीं अपितु उससे पूर्व ज्ञान और चिन्तन का माध्यम है।
भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम ही नहीं, वरन वह संस्कृति की वाहक भी है। साथ ही, अपने साहित्य के जरिये सामाजिक-सांस्कृतिक और परिवेशगत विशिष्टताओं को भी आधार प्रदान करती है। उत्तराखण्ड भाषा संस्थान राज्य सरकार का एक ऐसा सांस्थानिक प्रयास है जिसके माध्यम से उत्तराखण्ड में भाषाओं के संरक्षण, उनके विस्तार और प्रोत्साहन संबंधी कार्यों को संपादित किया जा रहा है। वर्ष 2010 में अपनी स्थापना के बाद से भाषा संस्थान ने विभिन्न परियोजनाओं, संगोष्ठियों और सम्मान कार्यक्रमों के जरिये साहित्यकारों और जनसामान्य तक पहुंचने का प्रयास किया है। उत्तराखण्ड राज्य अनेक उपभाषाओं और बोलियों का प्रयोग करने वाला ऐसा क्षेत्र है जहां विपुल मात्रा में साहित्य रचा गया है और वर्तमान में भी रचा जा रहा है। इस दृष्टि से भाषा संस्थान विभिन्न भाषाओं, उपभाषाओं और बोलियों के साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए सतत् रूप से प्रयासरत है। उत्तराखण्ड भाषा संस्थान आगामी वर्षों में भी अपनी विभिन्न प्रकाशन परियोजनाओं, भाषा एवं साहित्यिक-संगोष्ठियों एवं सम्मान कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण प्रदेश में अपनी गतिशीलता बनाए रखेगा।
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पुस्तकालय की स्थापना एवं पुस्तकों का...
लोक भाषा साहित्य, साहित्यिक पत्र- पत्रिकाएं, साहित्यिक पुस्तकें ही भाषा संस्थान को अपनी पहचान देंगी। भाषा संस्थान द्वारा प्रारम्भ की गई परियोजनाओं से उपलब्ध साहित्य को संरक्षित करने एवं अब…

संस्थान की शोध पत्रिका का प्रकाशन
1 भाषा संस्थान द्वारा साहित्यिक एवं शोध पत्रिका ‘उद्गाता’ एवं ‘केदारमानस’ का प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है, इस पत्रिकाओं में विभिन्न साहित्यिक विषयों एवं उत्तराखण्ड के प्रख्यात…
