जौनसार बावर क्षेत्र में पौराणिक काल से प्रचलित पंडवाणी गायन ‘बाकणा’के अभिलेखीकरण
जौनसार-बावर क्षेत्र में पौराणिक काल से प्रचलित बांकणा पंडवाणी गायन मुख्य रूप से पांडवों से जुडे़ प्रसंगों को पंचरते, नौरते, पूज तथा जेठ के भंडारे, दिवाली साहित अन्य अवसरों पर पांडव -नृत्य के समय विशेष शैली में गाने की परम्परा है। जौनसार में पांडवों के जुड़ी कथा-कहानियां, गीत-नृत्य रचे बसे हुए हैं। वर्तमान में इस गायन शैली की लोक परम्परा के विशेषज्ञ विलुप्ति के कगार पर पहुंच गये हैं, अतः लोक साहित्य की इस परंपरा को संरक्षित करने के लिए ‘बाकणा’ के अभिलेखीकरण (श्रव्य, दृशव्य, दस्तावेजीकरण) के लिए योजना संचालित की जानी प्रस्तावित है।
लाभार्थी:
--
लाभ:
--
आवेदन कैसे करें
—