उत्तराखण्ड में प्रकाशित होने वाली विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादकों का सम्मेलन
साहित्यिक पत्रकारिता साहित्य के विकास का अभिन्न अंग है। दोनों परस्पर एक-दूसरे का दर्पण हैं। इस दृष्टि से दोनों में द्वन्द्वात्मक और आव्यविक एकता सहज ही लक्षित की जा सकती है। वस्तुतः साहित्यिक पत्रकारिता हमारे आधुनिक साहित्यिक इतिहास का अत्यंत गौरवशाली स्वर्णिम पृष्ठ है। स्मरणीय है कि गद्य साहित्य और नवीन एवं मैलिक गद्य-विधाओं का उद्य ही हिन्दी पत्रकारिता की सृजनात्मक कोख से हुआ था। यह पत्रकारिता ही आरंभकालीन हिन्दी समाचार पत्रों के पृष्ठों पर धीरे-धीरे उभरने वाली अर्द्ध-साहित्यिक पत्रकारिता से क्रमशः विकसित होते हुए, भारतेन्दु युग में साहित्यिक पत्रकारिता के रूप में प्रस्फुटित हुई थी। और आज हमारे जीवन में रच-बस गयी है। यह पत्रिकाऐं लेखकों को अपने अंदर छुपी प्रतिभाओं को उभारने का माध्यम है, भाषा संस्थान उत्तराखण्ड से प्रकाशित होने वाली हिन्दी, उर्दू, पंजाबी एवं लोक साहित्य की विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं का सम्मेलन किया जाना प्रस्तावित है।
सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की जानी प्रस्तावित है-
- पत्र-पत्रिका के प्रकाशन की चुनौतियां एवं समाधान।
- पाठकों के लिए पत्रिकाओं का महत्व।
- पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित सामग्री की गुणवत्ता।
लाभार्थी:
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लाभ:
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आवेदन कैसे करें
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