राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय भाषा सम्मेलन
संस्थान की यह एक बहुआयामी योजना होगी, जिसमें शोध पत्रों का वाचन, राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय शोध सम्मेलन, काव्य गोष्ठियोें का आयोजन, भाषा संबंधी विचार-विनिमय, साहित्यिक शोभा यात्रा, लोक भाषा सम्मेलन, नाट्यमंचन तथा अन्य कार्यक्रम आदि का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है-
प्रख्यात दिवंगत रचनाकारों की जयन्ती एवं स्मृति दिवसों का आयोजनः- उŸाराखण्ड की इस पवित्र भूमि में विभिन्न भाषाओं के अनेक रचनाकारों, साहित्यकारों ने जन्म लिया है, इन साहित्यकारों के नाम उत्तराखण्ड के इतिहास मंे स्वर्ण अक्षरों में लिखने योग्य हैं। भाषा संस्थान का यह कर्Ÿाव्य है कि ऐसे स्वनामधन्य रचनाकारों के जन्म दिवस प्रेरणास्रोत के रूप में भव्यतापूर्वक आयोजित करें। प्रमुख सहित्यकारों की जयन्ती एवं स्मृति दिवसों को इनके जन्म स्थान में जाकर आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। इन कार्यक्रमों को उत्तराखण्ड के पंजीकृत संस्थाओं के साथ मिलकर किया जाना प्रस्तावित है।
हिन्दी दिवस एवं विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन- प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस एवं विश्व हिन्दी दिवस पर संस्थान द्वारा हिन्दी पखवाड़ा, हिन्दी सप्ताह, विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। जिसकी विधिवत योजना तैयार कर शासन एवं साधारण सभा व कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत की जानी प्रस्तावित है।
जोहारी, रं, थारू, बोक्सा, जौनसारी आदि जनजातीय बोली भाषाओं के संरक्षण हेतु शोध सम्मेलन- उत्तराखण्ड की सीमान्त क्षेत्रों में निवास करने वाले जनजातीय बोली भाषाओं, जो विलुप्ति की कगार पर है, इन बोली भाषाओं के संरक्षण हेतु संस्थान द्वारा एक शोध सम्मेलन का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है।
लाभार्थी:
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लाभ:
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आवेदन कैसे करें
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