लेखक से भेंट
साहित्य किसी भी रचनाकार की मनःस्थिति सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण समाज के प्रति उसके भावों का प्रतिबिम्ब होता है। सहित्य कृतियों से परे साहित्यकार के व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों, उतार-चढ़ाव, संघर्षों, साहित्यिक यात्रा भी उनके पाठकांे के लिए जिज्ञासा का विषय रहती है, साहित्यकार अपने कालजयी सृजन से पाठकों के साहित्यिक कृति/साहित्य में विराजमान है। इन साहित्यकारों का परिचय जन-जन तक पहुंचे एवं इनकी स्मृति सदैव हमारे पास संरक्षित रहे, इस उद्देश्य से संस्थान द्वारा हिन्दी, उर्दू, पंजाबी व आंचलिक विधाओं से जुड़े विभिन्न वयोवृद्ध साहित्यकारांे के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एकल एवं संयुक्त परिचर्चा आयोजित कर इसका प्रसारण दूरदर्शन व आकाशवाणी से किया जाना प्रस्तावित है, साथ ही इन परिचर्चाओं को वीडियो फिल्म के रूप में इकत्रित कर आधुनिक तकनीकी जैसे- रेडियो, यू-टयूब, फेसबुक, वेबसाईट आदि के माध्यम से शोधार्थियों एवं पाठकों तक पहुचाना चाहता है, जिससे साहित्यकार का व्यक्तित्व एवं कृतित्व को जीवन्त बनाये रखा जा सकता है।
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