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    शोध परियोजनाओं का संचालन

    दिनांक : 01/04/2025 - 31/03/2026 सेक्टर: --

    उत्तराखण्ड भाषा संस्थान द्वारा उत्तराखण्ड के लोक साहित्य, कला व संस्कृति के संरक्षण एवं उत्तराखण्ड के पूर्वज साहित्यकारों के बिखरे साहित्य के संकलन एवं प्रकाशन हेतु माह दिसम्बर, 2024 में निम्नलिखित तीन शोध परियोजनाओं हेतु विज्ञापन प्रकाशित किया गया, जिसमें निम्नलिखित 02 परियोजनाओं का प्रारंभ कर दिया है,  जिसे मार्च, 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है-

    01-प्रख्यात नाट्यकार ‘गोविन्द बल्लभ पंत’ का समग्र साहित्य संकलन

    02-उत्तराखण्ड के पूर्वज साहित्यकारों का 50 से 100 वर्ष पूर्व भारत की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित साहित्य का संकलन।

    उक्त शोध परियोजना के अतिरिक्त ‘उत्तराखण्ड की उच्च हिमालयी एवं जनजातीय भाषाआंे का संरक्षण एवं अध्ययन’ हेतु आवेदनों द्वारा मात्र एक भाषा/बोली के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत की गयी है, चूंकि उत्तराखण्ड में अनेक लोक बोलियाँ एवं भाषाएँ प्रचलन में है, अतः योजना के प्रारूप में परिवर्तन करते हुए 05 या 06 विषय विशेषज्ञों/विद्वानों का चयन कर उक्त योजना को पूर्ण किया जाना प्रस्तावित बोलियों का निर्धारण निम्नवत प्रस्तावित है-

    ग्रुप (क)

     

    ग्रुप (ख) ग्रुप (ग) ग्रुप (घ) ग्रुप (ड़) ग्रुप (च)
    कुमय्याँ  सोर्याली अस्कोटी सीराली   खसपर्जिया        चौगर्खिया गंगोली

    पछाईं

    दनपुरिया   रौ-चौभैंसी

    श्रीनगरी, बधाणी,  दसौल्या,

    माझ कुम्मैया,

    नागपुरिया,      सलाणी,

    राठी

    टकनौरी

    बाड़ाहटी, रमोल्या,     जौनपुरी, रवांल्टी,

    बडियारगड्डी, टिहरियाली जौनसारी

     

    राजी       बोक्सा,  जोहारी,  चौंदासी,     व्यासी

    थारू

    भोटिया,     तोल्छा,

    मारछा,

    रं,

    शौका,  दरमियां,    जाड़

    गूजरी,    कौरवी,

    खड़ी बोली

     

     

     

    लाभार्थी:

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    लाभ:

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    आवेदन कैसे करें

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