साहित्य ग्राम की स्थापना
उत्तराखण्ड पर्यटन, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं साहित्यिक भूमि है, यहां पर देश-विदेशों से करोड़ों की संख्या में प्रतिवर्ष भ्रमण पर उत्तराखण्ड आते हैं। प्रदेश एवं देश के साहित्यकारों द्वारा भावनाएं व्यक्त की जाती है कि शहरों के इस भाग-दौड़ भरे जीवन में उत्कृष्ट साहित्य सृजन नहीं किया जा सकता है, इसके लिए एकाग्रता की आवश्यता होती है। इस हेतु सुझाव दिया जाता है कि उत्तराखण्ड देश प्रदेश के साहित्यकारों के लिए ऐसा स्थान तैयार करे जहां पर प्रकृति के बीच में साहित्य सृजन, साहित्यकारों के मध्य गोष्ठी, चर्चा-परिचर्चा, पढ़ने के लिए पुस्तकालय हों, इस योजना को परिणीत करने के उद्देश्य से संस्थान द्वारा 02 साहित्य ग्राम स्थापित किये जाने प्रस्तावित है, जिसमें पर्याप्त कक्ष, पुस्तकालय, छोटा साभागार आदि हो। इसके लिए कुमाऊं एवं गढ़वाल के संबंधित जिलाधिकारियों को भूमि उपलब्ध कराये जाने हेतु पत्र प्रेषित किये गये हैं, भूमि उपलब्ध होने पर साहित्यग्राम स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
लाभार्थी:
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लाभ:
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आवेदन कैसे करें
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